![]() |
| श्री रविशंकर श्रीवास्तव |
रवि जी के जाने की बात से बात शुरू की थी, पर उनका माद्दा और उनकी जीवटता जीवन के लिए बड़ी प्रेरणा साबित हुई। मेरा शुरू से मानना था कि जिंदगी में रिसर्च एक मौलिक तत्व की तरह विद्द्यमान होना चाहिए। जिसको रिसर्च करना आता है वो अपनी ज़िंदगी को बेहतर बनाने के लिए लगातार कोशिश करता रहेगा। मेरी तेल की यात्रा भी इसी रिसर्च का परिणाम है। मेरा मानना है, जो होना चाहिए, दिखना चाहिए ,उसका इस्तेमाल अपनी जिंदगी के उत्तरोत्तर सुधार के लिए किया जाना चाहिए। मैंने इस बात को ज्यादा जाना, परखा और शिद्दत से महसूस किया और फिर मैंने अपने जॉब से रिटायरमेंट ले लिया। मुझे लगा कि जिंदगी तो बस एक ढर्रे में चल रही थी, वही ऑफिस, वही ट्रेनिंग, वही घिसे पिटे लेक्चर्स। कोई भी नयापन नहीं। रिटायरमेंट के बाद जड़ी बूटियों के प्रति उत्सुकता ने एक नए प्रयोग के लिए प्रेरित किया और वो था बाबूजी के मालिश के तेल पर और शोध करना। बाबूजी अक्सर एक तेल घर पर बनाते थे जिसमे ढेरों जड़ीबूटिओं को मिलाकर तेल को धूप में कई दिनों तक पकाया जाता था।
इसके बहुत उत्साह जनक नतीज़े मिले। आयुर्वेद के प्रति आस्था और जड़ी बूटियों का प्रेम, दोनों ने मिलकर इस रिसर्च को नया आयाम दिया। नयी नयी जड़ी बूटियाँ जुड़ती गयीं। ये घटना 03 वर्ष पुरानी है, जब प्रयोग शुरू किये थे, आज 18 से ज्यादा बैच बन चुके हैं और 120 से ज्यादा लोगों ने इसे आजमाया है। उनके फ़ीडबैक का परिणाम है कि मसाज़ के तेल की गुणवत्ता ने एक मुकाम हासिल कर लिया है।
इसे कभी भी बाज़ार में नहीं उतरा गया न ही ऐसी कोई कल्पना है। कारण , एक तो बनाने की प्रक्रिया बड़ी कठिन है। दूसरे एक बैच में 02 लीटर आयल ही बनता है। यह अनुभव किया की बड़ा बैच बनाने से क़्वालिटी पर असर आ जाता है। आज तक 26 से ज्यादा बैच बन चुके हैं और केवल उन्हें ही उपलब्ध कराते हैं जो इसका नियमित इस्तेमाल करते हैं। है। इसका 65 लोगों पर लगातार 02 वर्षों तक इस तेल के उपयोग का निरीक्षण किया गया और यह पाया कि यह तेल जोड़ों के दर्द, ऐंठन, मांसपेशियों की जकड़न, घुटने, कमर और पीठ के दर्द में अचूक कारगर है। घुटने के दर्द में इसके प्रयोग के अचूक परिणाम मिले हैं। पूरे शरीर में लगातार मालिश विशेषकर गर्दन, रीढ़ की हड्डी और हाथ पैर के तलुओं में तेल को रगड़कर सुखाने से शरीर में खून के दौड़ान बढ़ जाती है। मसल्स शैथिल्य की स्थिति में इसकी नियमित मालिश से मांसपेशियाँ मजबूत हो जाती हैं। नाभि में इसके प्रयोग से चेहरे की कांति बढ़ती है। नाक में एक बूंद डालकर रखने से बंद नाक खुल जाती है। गर्भिणी महिलाओं और बच्चों में मालिश के लिए यह तेल बहुत मुफ़ीद है।
रवि जी और गुरुदत्त जी की प्रेरणा से बहुत से लोगों ने इसे प्रयोग किया और उनका अनुभव आशातीत से बढ़कर था। रवि जी के एक मित्र जो चलने फिरने से लाचार थे, ने छः माह तक लगातार मसाज आयल का प्रयोग किया और बक़ौल उनके वो चार धाम यात्रा कर आये। मैं उन सभी सुधीजनों को साधुवाद देता हूँ जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया और इसके प्रयोग के अपने अनुभव लगातार शेयर किये जो समय समय पर तेल की क्वालिटी के बदलाव के साक्षी बने।
