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Friday, 27 September 2024

बॉडी मसाज ऑइल-कुछ अनुभूत प्रयोग- १

श्री रविशंकर श्रीवास्तव
आज बहुत दिनों के बाद ब्लॉग लिखने बैठा हूँ।  अनमयस्क हूँ क्युकी मेरे तेल की यात्रा के मेरे प्रेरणाश्रोत श्री रविशंकर श्रीवास्तव, अब हमारे बीच नहीं रहे। वो बहुत समय से एक बड़ी गंभीर बीमारी से पीड़ित जिसमे उनके शरीर में खून नहीं बनता था और वस्तुतः इसी बीमारी के कारण उन्होंने अपनी शासकीय सेवा से सेवानिवृति ले ली थी। पर रवि जी का उत्साह देखते ही बनता था। उन्हें उनके परिचित और ब्लॉगर रवि रतलामी के नाम से जानते थे। वे प्रत्यक्षतः रतलाम, मध्य प्रदेश से थे। उन्होंने स्टेट इलेक्ट्रिकल डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी में 20 वर्षों तक इलेक्ट्रिकल उपकरणों के रख-रखाव में कार्य किया और इसके बाद स्वेच्छा से सेवा निवृत्ति ग्रहण कर फ्रीलांस तकनीकी लेखक और तकनीकी अनुवादक के रूप में कार्य किया। वे हिंदी ब्लॉगिंग के प्रारंभिक और प्रभावशाली लेखकों में से एक थे। उन्होंने पहली हिंदी यूनिकोड पत्रिका 'रचनाकार' स्थापित की और सम्पादित की, जो हिंदी इंटरनेट समुदाय में साहित्यिक और तकनीकी योगदान को बढ़ावा देती रही। उनके हिंदी ब्लॉग को पाठकों ने विनोदी और लोकप्रिय माना, और उन्होंने कई नए हिंदी ब्लॉगरों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। रवि रतलामी का निधन 7 जनवरी 2024 को बेंगलुरु में हुआ। आज उन्हें याद करके मन में ढेरों विचारों का उफ़ान उठ खड़ा हुआ है। कुछ परिचितों ने अपने अनुभव साझा किये जो मील के पत्थर साबित हुए। विशेषकर रवि जी जो आज हम सबके बीच में नहीं हैं लेकिन उनकी बेबाक़ टिप्पणियाँ बहुत महत्वपूर्ण होती थीं। ईश्वर उनको अपने श्री चरणों में स्थान देवें और वे सूक्ष्म सत्ता से आज भी हमारे मन को आंदोलित करते हैं। 

रवि जी के जाने की बात से बात शुरू की थी, पर उनका माद्दा और उनकी जीवटता जीवन के लिए बड़ी प्रेरणा साबित हुई। मेरा शुरू से मानना था कि जिंदगी में रिसर्च एक मौलिक तत्व की तरह विद्द्यमान होना चाहिए। जिसको रिसर्च करना आता है वो अपनी ज़िंदगी को बेहतर बनाने के लिए लगातार कोशिश करता रहेगा। मेरी तेल की यात्रा भी इसी रिसर्च का परिणाम है। मेरा मानना है, जो होना चाहिए, दिखना चाहिए ,उसका इस्तेमाल अपनी जिंदगी के उत्तरोत्तर सुधार के लिए किया जाना चाहिए। मैंने इस बात को ज्यादा जाना, परखा और शिद्दत से महसूस किया और फिर मैंने अपने जॉब से रिटायरमेंट ले लिया। मुझे लगा कि जिंदगी तो बस एक ढर्रे में चल रही थी, वही ऑफिस, वही ट्रेनिंग, वही घिसे पिटे लेक्चर्स।  कोई भी नयापन नहीं। रिटायरमेंट के बाद जड़ी बूटियों के प्रति उत्सुकता ने एक नए प्रयोग के लिए प्रेरित किया और वो था बाबूजी के मालिश के तेल पर और शोध करना। बाबूजी अक्सर एक तेल घर पर बनाते थे जिसमे ढेरों जड़ीबूटिओं को मिलाकर तेल को धूप  में कई दिनों तक पकाया जाता था। 
उसी से नहाने के पहले हम सब बच्चों की मालिश होती थी। और ये सिलसिला तब तक चला जब तक बाबूजी रहे। मैंने उनके फॉर्मूले में बदलाव किये। सरसों के तेल की जगह ओलिव आयल और बादाम का तेल लिया और बहुत खोजबीन कर 29 जड़ी बूटियाँ चुनी। बनाने का तरीका भी बिलकुल आयुर्वेद सम्मत, जिसमे भावना देना, शुध्दि करना, शोधन करना इत्यादि शामिल है। बनाने के बाद पहला प्रयोग खुद करके देखा की इसका असर शरीर पर किस तरह होता है। फिर इसे परिवार के अन्य सदस्यों ने इसके इस्तेमाल पर अपने अनुभव शेयर किया। फिर इसे फॅमिली के क़रीबी लोगों के साथ शेयर किया। 

इसके बहुत उत्साह जनक नतीज़े मिले। आयुर्वेद के प्रति आस्था और जड़ी बूटियों का प्रेम, दोनों ने मिलकर इस रिसर्च को नया आयाम दिया। नयी नयी जड़ी बूटियाँ जुड़ती गयीं। ये घटना 03 वर्ष पुरानी है, जब प्रयोग शुरू किये थे, आज 18 से ज्यादा बैच बन चुके हैं और 120 से ज्यादा लोगों ने इसे आजमाया है। उनके फ़ीडबैक का परिणाम है कि मसाज़ के तेल की गुणवत्ता ने एक मुकाम हासिल कर लिया है। 
इसे कभी भी बाज़ार में नहीं उतरा गया न ही ऐसी कोई कल्पना है। कारण , एक तो बनाने की प्रक्रिया बड़ी कठिन है।  दूसरे एक बैच में 02 लीटर आयल ही बनता है।  यह अनुभव किया की बड़ा बैच बनाने से क़्वालिटी पर असर आ जाता है। आज तक 26 से ज्यादा बैच बन चुके हैं और केवल उन्हें ही उपलब्ध कराते हैं जो इसका नियमित इस्तेमाल करते हैं। है। इसका 65 लोगों पर लगातार 02 वर्षों तक इस तेल के उपयोग का निरीक्षण किया गया और यह पाया कि यह तेल जोड़ों के दर्द, ऐंठन, मांसपेशियों की जकड़न, घुटने, कमर और पीठ के दर्द में अचूक कारगर है। 
घुटने के दर्द में इसके प्रयोग के अचूक परिणाम मिले हैं।  पूरे शरीर में लगातार मालिश विशेषकर गर्दन, रीढ़ की हड्डी और हाथ पैर के तलुओं में तेल को रगड़कर सुखाने से शरीर में खून के दौड़ान बढ़ जाती है। मसल्स शैथिल्य की स्थिति में इसकी नियमित मालिश से मांसपेशियाँ मजबूत हो जाती हैं। नाभि में इसके प्रयोग से चेहरे की कांति बढ़ती है। नाक में एक बूंद डालकर रखने से बंद नाक खुल जाती है। गर्भिणी महिलाओं और बच्चों में मालिश के लिए यह तेल बहुत मुफ़ीद है।
रवि जी और गुरुदत्त जी की प्रेरणा से बहुत से लोगों ने इसे प्रयोग किया और उनका अनुभव आशातीत से बढ़कर था। रवि जी के एक मित्र जो चलने फिरने से लाचार थे, ने छः माह तक लगातार मसाज आयल का प्रयोग किया और बक़ौल उनके वो चार धाम यात्रा कर आये। मैं उन सभी सुधीजनों को साधुवाद देता हूँ जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया और इसके प्रयोग के अपने अनुभव लगातार शेयर किये जो समय समय पर तेल की क्वालिटी के बदलाव के साक्षी बने। 






 







एक सत्य एक विचार

कुछ बातों पर मेरे जैसा बुजुर्ग बात करना पसंद नहीं करेगा   _*"मुझसे पेंशन की बात मत करो और ना ही आज्ञाकारी संतान की। मैं तुम्हें एक कठोर...